×

जय श्री राम 🙏

सादर आमंत्रण

🕊 Exclusive First Look: Majestic Ram Mandir in Ayodhya Unveiled! 🕊

🕊 एक्सक्लूसिव फर्स्ट लुक: अयोध्या में भव्य राम मंदिर का अनावरण! 🕊

YouTube Logo
श्रीराम मंदिर, अयोध्या - Shri Ram Mandir, Ayodhya
लाइव दर्शन | Live Darshan
×
YouTube Logo

Post Blog

The Incredible Story of Lord Ram

रामायण : भरत-शत्रुघ्न ननिहाल जाते हैं । दशरथ राम के राज्याभिषेक का निर्णय लेते हैं।

रामायण : Episode 12

भरत-शत्रुघ्न ननिहाल जाते हैं । दशरथ राम के राज्याभिषेक का निर्णय लेते हैं।

भरत के विवाहोत्सव में शामिल होने के लिये उनके मामा युधाजित अयोध्या में हैं। कुछ दिन बाद रानी कैकेयी के पिता राजा अश्वपति का स्वास्थ्य खराब होने की सूचना आती है इसलिए कैकेयी भरत-शत्रुघ्न को अपने मामा के साथ कैकेय प्रदेश जाने के लिये कहती हैं। भरत शत्रुघ्न पितातुल्य अग्रज राम और भाभी सीता का आशीर्वाद लेते हैं। राम अपने भाई से दूर नहीं रहना चाहते इसलिये उनका मन भरत संग जाने का है लेकिन वे माता पिता की सेवा के लिये अयोध्या में ही रूकते हैं। ऋषि विश्वामित्र भी अब अयोध्या से विदा लेना चाहते हैं। राजा दशरथ उनसे रूकने का आग्रह करते हैं किन्तु विश्वामित्र जानते हैं कि यदि वे राजमहल की मोहमाया में फँसते हैं तो वे पुनः अपने कर्तव्य पथ से विमुख हो जायेंगे। ऋषि विश्वामित्र उन्हें अपनी कथा सुनाते हैं कि किस प्रकार इन्द्र ने मेनका को उनकी तपस्या भंग करने के लिये भेजा था। मेनका ने अपनी अदाओं से उनको मोहित किया था और उनकी तपस्या भंग कर दी थी। महर्षि वशिष्ठ भी दशरथ को समझाते हैं कि नदी और साधु का एक स्थान पर रूकना ठीक नहीं होता। विश्वामित्र जी के जाने के बाद भी उनके ये वचन राजा दशरथ के कानों में गूँजते रहते हैं कि सांसारिक कर्तव्य पूरे करने के बाद मनुष्य को अपने पारिवारिक बन्धन तोड़कर अध्यात्म की तरफ मुड़ जाना चाहिये। दशरथ महर्षि वशिष्ठ के आश्रम जाकर उनसे एकान्त में अपनी मन की बात कहते हैं कि वे राम को राजपाट सौंपना चाहते हैं। वशिष्ठ उनसे इसके लिये वंश परम्परानुसार राजसभा बुलाने का परामर्श देते हैं। राजसभा में सर्वसम्मति से राम के राज्याभिषेक का अनुमोदन होता है। राम को राजसभा में बुलाया जाता है। सभा में वशिष्ठ राम से राज्यभार सम्भालने को कहते हैं। राम अपने पिता का राज सिंहासन ग्रहण करने को अनुचित बताकर इस निर्णय को अस्वीकार कर देते हैं। दशरथ राम को पुत्र-धर्म का भान कराते हैं। वशिष्ठ भी राम को बताते हैं कि मोक्ष प्राप्ति के लिये दशरथ का वानप्रस्थ आवश्यक है। अन्ततः राम भारी मन से इस निर्णय को राजाज्ञा मानकर स्वीकार करते हैं। पूरे सभागृह में राजा रामचन्द्र की जय जयकार होती है। राम के राज्याभिषेक का समाचार राजमहल पहुँचता है। माता कौशल्या की प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं है। छोटी रानी सुमित्रा अपने पुत्र लक्ष्मण को राजा राम के आधीन करती हैं।

रामायण के प्रसिद्ध पात्र

Kusha - कुश

कुश एक महत्वपूर्ण चरित्र है जो रामायण में प्रकट होता है। कुश के पिता का नाम राम है, जो दशरथ के पुत्र और अयोध्या के राजा थे। उनकी माता का नाम सीता है, जो राम की पत्नी और जानकी भी थीं। कुश की जन्मकथा रामायण के उत्तर काण्ड में वर्णित है। उनकी भाई का नाम लव है और वे दोनों हनुमान के पालित नगर नंदिग्राम में बड़े हुए।

कुश को एक धर्मी और न्यायप्रिय युवा के रूप में प्रदर्शित किया गया है। वे एक ब्राह्मण गुरु के पास अध्ययन करते हैं और धर्म, ज्ञान, और योग्यता में प्रवीण होते हैं। उन्होंने गुरुवचन पालन करके शस्त्र और वेदों का अध्ययन किया। वे एक अद्वैती और सनातन धर्म के पक्षपाती हैं और आत्मविश्वास और साहस के धनी हैं। कुश धर्म का पालन करते हुए लोगों की सेवा करने के लिए उनके पिता की पदवी को धारण करने की कामना करते हैं।

कुश की शारीरिक वर्णना रामायण में विस्तृत रूप से की गई है। उन्हें सुंदर, कोमल, और अत्यंत आकर्षक चिह्नों से लिप्त बताया गया है। उनके मस्तिष्क की शानदारता, विद्या और ताकत की प्रतीक्षा का प्रदर्शन करती है। उनकी कानों में मुकुट या मुकुट के समान चार ज्योतियां होती हैं, जो उनकी दिव्यता को दर्शाती हैं। उनकी आंखें सोने और पुष्पों की तरह चमकती हैं, जो उनके पौराणिक महत्व को दर्शाती हैं।

कुश एक अत्यंत प्रभावशाली और करिश्माई वक्ता हैं। वे अपने मनोहारी आवाज़ और उच्च स्वर में वेदों, शास्त्रों, और पौराणिक कथाओं का पाठ करते हैं। कुश के वचनों का प्रभाव उनके श्रोताओं के हृदय पर अत्यधिक होता है और उनकी बातों को सुनकर लोग विश्वास करते हैं। वे उच्च साधना और समर्पण की संख्या में अग्रणी होते हैं और उन्हें अपने उच्च दर्जे पर स्थानांतरित किया जाता है।

कुश का चरित्र रामायण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे राजा राम की वंश के प्रतिनिधि होते हैं और वहां धर्म, न्याय, और सत्य के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत होते हैं। उनकी उच्चतम प्राथमिकता राष्ट्रीय हित की रक्षा करना है और उन्हें अपने पिता के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। उनकी उत्साहपूर्ण व्यक्तित्व, उदारता, और अद्भुत धैर्य उन्हें एक महानायक के रूप में स्थानांतरित करते हैं।

कुश रामायण के प्रमुख कार्यकारी क्षेत्रों में भी गतिविधि करते हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रशासनिक न्याय, और न्यायिक विवादों के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान देते हैं। उन्होंने अपने न्यायशास्त्र के ज्ञान का उपयोग करके न्यायिक निर्णयों में योगदान किया है और अपनी अद्वितीय बुद्धिमत्ता के माध्यम से अपराधियों को सजा दी है। कुश का चरित्र एक आदर्श नागरिक, प्रशासक, और न्यायिक कार्यकर्ता का प्रतिष्ठान करता है।

कुल मिलाकर, कुश रामायण में एक महत्वपूर्ण चरित्र है जो अपनी धार्मिकता, ज्ञान, और न्यायप्रियता के कारण प्रशंसा पाते हैं। उनकी उच्चतम प्राथमिकता राष्ट्रीय हित की सेवा करना है और वे अपने पिता के पदवी को अपनाने की कामना करते हैं। कुश का चरित्र आदर्श नागरिक का प्रतिष्ठान करता है और वे धर्म, न्याय, और सत्य के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित होते हैं। उनकी योग्यता, नेतृत्व कौशल, और व्यक्तिगत गुण उन्हें एक महानायक के रूप में बनाते हैं।



Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Sanskrit shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Hindi shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner English shlok

|| सिया राम जय राम जय जय राम ||

News Feed

ram mandir ayodhya news feed banner
2024 में होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था. अब मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि उन्होंने अब इसके लिए जो समय सीमा तय की है वह दो माह पहले यानि अक्टूबर 2023 की है, जिससे जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होते ही भव्य और दिव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

ram mandir ayodhya news feed banner
रामायण कालीन चित्रकारी होगी

राम मंदिर की खूबसूरती की बात करे तो खंभों पर शानदार नक्काशी तो होगी ही. इसके साथ ही मंदिर के चारों तरफ परकोटे में भी रामायण कालीन चित्रकारी होगी और मंदिर की फर्श पर भी कालीननुमा बेहतरीन चित्रकारी होगी. इस पर भी काम चल रहा है. चित्रकारी पूरी होने लके बाद, नक्काशी के बाद फर्श के पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर स्थित निर्माण स्थल तक लाया जाएगा.

ram mandir ayodhya news feed banner
अयोध्या से नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेन

भारतीय रेलवे अयोध्या और नेपाल के बीच जनकपुर तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर अगले महीने ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ चलाएगा. रेलवे ने बयान जारी करते हुए बताया, " श्री राम जानकी यात्रा अयोध्या से जनकपुर के बीच 17 फरवरी को दिल्ली से शुरू होगी. यात्रा के दौरान अयोध्या, सीतामढ़ी और प्रयागराज में ट्रेन के ठहराव के दौरान इन स्थलों की यात्रा होगी.